{"product_id":"padhna-likhna-aur-baal-sahitya-mere-anubhav","title":"Padhna Likhna aur Baal Sahitya-Mere Anubhav","description":"\u003cp\u003eबच्चों के साहित्य की क्या खासियत होनी चाहिए? इसके चित्र कैसे होने चाहिए? कैसे की जानी चाहिए बच्चों के साथ किताबों पर बातचीत? क्या बच्चों के साहित्य और बड़ों के साहित्य के बीच कोई स्पष्ट विभाजन मौजूद है? भारत और कुछ अन्य देशों के बाल साहित्य में समय के साथ किस तरह के बदलाव आए हैं? क्यों जरूरी है पुस्तकालय? एक सक्रिय पुस्तकालय को विकसित करने के लिए किस तरह के कदम उठाए जा सकते हैं? इस किताब को पढ़कर आपको इन सवालों और इन जैसे तमाम सवालों के जवाब मिलेंगे।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eजैसा कि आमुख में कृष्ण कुमार लिखते हैं, \"बच्चों की शिक्षा और साहित्य के बीच अंतरंग संबंध है। इसी यकीन के साथ एक और यह किताब बाल साहित्य की मदद से बच्चों में बुनियादी साक्षरता के विकास की बात करती है। वहीं दूसरी ओर, किताबों से बच्चों का रिश्ता बनाने और उन्हें ऐसा पाठक बनाने की बात भी करती है जो सिर्फ मजे के लिए पढ़ता हो। सरल-सी भाषा में लिखी गई यह किताब उन सभी लोगों के लिए है जो बच्चों और बड़ों की जिन्दगी में बाल साहित्य की अहमियत को समझते हैं या समझना चाहते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Eklavya","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":50304985006337,"sku":"9789376120055","price":160.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0663\/4589\/4145\/files\/PadhnaLikhnaaurBaalSahitya-MereAnubhavFront.png?v=1789024610","url":"https:\/\/eklavyapitara.in\/products\/padhna-likhna-aur-baal-sahitya-mere-anubhav","provider":"Eklavya Pitara","version":"1.0","type":"link"}