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Shiksha Me Badlaav Ka Savaal -Samajik Anubhavon Se Neeti Tak

Shiksha Me Badlaav Ka Savaal -Samajik Anubhavon Se Neeti Tak

शिक्षा में बदलाव का सवाल -सामाजिक अनुभवों से नीति तक
Publisher: Eklavya
Author: Anil Sadgopal
Translator: .
ISBN: 978-81-99299-59-7
Binding: Paperback
Language: Hindi
Pages: 421
Published: Nov-2025
Regular price ₹ 350.00
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अनिल सद्गोपाल का शिक्षाशास्त्र उनके अनुभव और संघर्ष से उपजा है, इसलिए गहन और अनोखा है। मैं उनकी दृष्टि और सोच को समझने का प्रयास जब भी करता हूँ, हमेशा कुछ नया पाता हूँ- खासकर बदलाव के सवाल पर। उनकी यह किताब बदलाव को शिक्षा, समाज और देश के व्यापक सन्दर्भ में रखकर टटोलती है और इस बात की गहरी चिन्ता जगाती है कि समता और न्याय के मूल्यों से दूर जा रही शिक्षा समाज में किस तरह का बदलाव लाएगी। अनिल सद्गोपाल का लेखन हमें अपने समय के एक ऐसे शिक्षाविद् से बात करने का आमंत्रण है जिसने अन्तर्विरोधों के विश्लेषण से नई राहें निकालने का प्रयास कभी नहीं छोड़ा।

कृष्ण कुमार

आम तौर पर स्वैच्छिक संस्थाओं में काम करने वाले लोग अपने समृद्ध सामाजिक अनुभवों को राष्ट्रीय मुद्दों और नीतिगत सवालों से जोड़ नहीं पाते। यह किताब इस लीक से हटकर काम करने और वैज्ञानिक चिन्तन का परिणाम है। बात चाहे शिक्षा में परिवर्तन की हो या शिक्षा के ज़रिए सामाजिक बदलाव की, अक्सर लोग इसका समाधान किसी स्वैच्छिक संस्था का निर्माण करके अथवा चन्द स्कूलों में नवाचार में खोजते रहे हैं। इस किताब में काफी लम्बे सामाजिक अनुभव और आन्दोलन के विश्लेषण के आधार पर स्वैच्छिक संस्थाओं के कार्यक्षेत्र के इस भ्रम को चुनौती दी गई है। साथ ही लेखक ने राष्ट्रीय स्तर पर अनेक शैक्षिक आयोगों, समितियों और अन्य मंचों से हिस्सेदारी के दौरान जो सीखा है, उनकी सीमाओं और सम्भावनाओं की वस्तुनिष्ठ व्याख्या भी प्रस्तुत की गई है।

इस किताब में ज़ोरदार वकालत की गई है कि आज़ादी के 79 साल बाद भी शिक्षा के बदलाव और औपनिवेशिक ढाँचे में फँसे रहने का असली कारण देश में अपनाई गई शिक्षा नीतियों में अन्तर्निहित विरोधाभासों और विकृतियों में खोजा जा सकता है।

शिक्षा पर भूमण्डलीकरण और बाज़ारीकरण के प्रभावों तथा हाल में भारतीय स्कूल व्यवस्था में विश्व बैंक की दखलन्दाज़ी के कारण बढ़ते हुए राष्ट्रीय संकट के प्रति हम सबको सतर्क किया गया है। आज के शैक्षिक हालात को बदलने के लिए यह किताब एक ज़रूरी परिप्रेक्ष्य तथा विकास की रूपरेखा भी पेश करत है। भारतीय शिक्षा के सुधार और भारत के नवनिर्माण में दिलचस्पी रखने वाव हर व्यक्ति को यह किताब प्रेरित करेगी।

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